कविता

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हम तो छात्र अभागे हैं…

रमेश कुमार मिश्र क्यों करते हो जादू टोना, क्यों देते हो झूठा खिलौना सब कुछ तो तुमने छीन लिया अब क्या पढ़ना भी छीनोगे हम तो छात्र अभागे हैं अभी…

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ग़ज़ल

बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…

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श्रद्धांजलि
हमने कब चाहा
वतन के लाल
सिंदूर
उद्घोष पहलगाम के
viharika poem

विहारिका

रमेश कुमार मिश्र मैं उन्मुक्त गगन की हूँ मलिका नभ विचरण है अभिसार मेरा. मैं पुण्य धरा की नवल किशोरी , है प्रकृति पुष्प श्रृंगार मेरा. मैं पुरुष हृदय की…

तलाक