ग़ज़ल
बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…
बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…
अंशुमान एस०द्विवेदी हमारे रामलला वैकुंठ में जब रामलला से मिले होंगे तो क्या बात कर रहे होंगे..? शायद बाबा रामजी से बहुत शांत आवाज़ में बात कर रहे होंगे… बिना…
अरुणाकर पाण्डेय कुछ भी तो नहीं लिखना था न कोई शब्द याद रखना था न कोई अर्थ ढूंढना था सिर्फ लेनी थी थोड़ी सी साँस पीना था थोड़ा पानी तकिए…
संपादक की कलम से–गंभीरता से लें अपने जीवन में विवाह न करने के फैसले को । यदि आप एक युवा हैं और आपने अभी तक शादी नहीं किया है और…
रमेश कुमार मिश्र (लेखक) रजनी बाई औरों के साथ छज्जे पर खड़ी होकर ग्राहकों को अपने जिस्म का नूरे व्यापार करने को कभी शरीर के नाजुक अंगों को मटकाकर तो…
अश्रुपूरित नमन है तुमको हे देवता । गगन भी मगन है पा तुमको हे देवता ।। यूं तो आते हैं जग में मनुज बनकर सभी । कोई-कोई ही होता है…
रमेश कुमार मिश्र हमने कब चाहा जीत हमीं को मिले , जीत में तेरे जीत छुपी है मेरी । हमने कब चाहा शोहरत हमीं को मिले , तेरी शोहरत में…
रमेश कुमार मिश्र ठहरिए अगर आप अपनी गाडी से किसी बीमार परिवारीजन या परिजन को लेकर सफदरजंग अस्पताल जा रहे हैं तो गाडी लगाने से पहले यहां की पार्किंग का…
रमेश कुमार मिश्र सरकारी आंकडें अपनी तारीफ में कितने ही कसीदे क्यों न पढते रहें लेकिन जमीनी हकीकत तो यही है कि उत्तर प्रदेश की वर्तमान बिजली व्यवस्था लचर स्थिति…
भारत में आज भी सरकारी अस्पतालों के ट्वायलेट बद से बदतर हैं … रमेश कुमार मिश्र इसे विडंबना कहें या अनदेखी समझ नहीं आता कि आजादी के पचहत्तर वर्ष बाद…