प्रकृतांक
रमेश कुमार मिश्र लहर बीच सूर्य है कि सूर्य बीच लहर है. कि जल बीच कंचन ने आभा पसारी है, दृष्टि ही पीत है कि पीत स्वर्ण दृष्टि है, सहज…
रमेश कुमार मिश्र लहर बीच सूर्य है कि सूर्य बीच लहर है. कि जल बीच कंचन ने आभा पसारी है, दृष्टि ही पीत है कि पीत स्वर्ण दृष्टि है, सहज…
रमेश कुमार मिश्र मैं कलम हूँ मेरा वजूद मेरी स्याही है, मैं थिरकती हूँ कवि तर्जनी पर अविराम. हो हृदय में पीर भारी , या कि उठती हों हिलोरें, मैं…
एक शांति के लिए अरुणेश मिश्र एक शांति के लिए आदमी क्या क्या करता है ? किसी रूपसी के आंचल की छांव खोजता है । वन प्रान्तर में घूम घूम…
प्रणय के गीत ठाकुर प्रसाद मिश्र साथ दो यदि तुम प्रिये तो हम क्षितिज के पार जायें। हाथ दो तो चन्द्र तारक गोंद ले लोरी सुनाएं। जगमगाती वह प्रभा जो…
स्वच्छ भारत ठाकुर प्रसाद मिश्र सिंगल यूज प्लास्टिक त्यागो, यह जीवन पर भारी है | अगणित दुर्गुण का यह स्वामी इससे जगत दुखारी है || सर सरिता सागर तक दूषित…
हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर भावबोहित शुभकामनाएं ठाकुर प्रसाद मिश्र लिपि देवनागरी, अमिय गागरी, शब्द सागरी जय हिंदी। तुम युग प्रत्याशा राष्ट्र की भाषा, भारत माँ मस्तक विंदी।। तुम्हें…
मोबाइल से चैट न करना अरुणेश मिश्र कौन जानता दर्द किसी का क्या लेना क्या देना है ? कैसे किसका जीवन चलता कैसा साग चबेना है ? कितने दिन से…
जीवन के हकीकत को बयां करती हुई मेरी रचना अनुज परीक्षित पाण्डेय नखरे हैं किस बात के पगले,किसका तुझे गुमान रे तेरी भी डोली जाएगी,आखिर में शमसान रे।। माया का…
मदिरे सतस: धिक्कार तुझे, मदिरे है ! नमन हजार तुझे ठाकुर प्रसाद मिश्र मदिरे सतस: धिक्कार तुझे, मदिरे है ! नमन हजार तुझे चौदह रत्नों में कहलाई सुर नर मुनि…
शांतवन है क्लांतमन दिग्भ्रान्त तन है तुम नहीं हो ! अरुणेश मिश्र शांतवन है क्लांतमन दिग्भ्रान्त तन है तुम नहीं हो ! साथ किसके रह रही हो ? तुम हमारे…