आलेख

भारतेन्दु हरिश्चंद्र

भारतेंदु दिवस का एक अर्थ स्त्री आधुनिकीकरण भी है

भारतेंदु दिवस के अवसर पर विशेष अरुणाकर पाण्डेय पिछले कई दिनों से स्त्री अपराध से संबंधित मुद्दे भारत के मानस और राजनीति का केंद्र बने हुए हैं | स्त्री लगातार…

शिक्षक दिवस

शिक्षक दिवस

ठाकुर प्रसाद मिश्र नाम छोटा वृतांत बड़ा यहाँ यह उक्ति चरितार्थ होती है। जब हमारी वाणी से शिक्षक शब्दनिकलता है।शिक्षक यानी गुरु! प्रथम शिक्षा “गुरू” माता दूसरा पिता। उसके बाद…

जब उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों के डर से कलम ने घुटने टेके

जब उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों के डर से कलम ने घुटने टेके

जब उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों के डर से कलम ने घुटने टेके अरुणाकर पाण्डेय अत्याचार से आंखें मोड़ने की पत्रकारिता जगत में अनगिनत चर्चाएं होती हैं और अनेक बार मीडिया…

अति सीधे हैं तो कट जाएंगे

निर्धन पुरुष का त्याग वेश्या भी कर देती है –आचार्य चाणक्य 

निर्धन पुरुष का त्याग वेश्या भी कर देती है रमेश कुमार मिश्र निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्. खगाय: वीतफलं वृक्षं भुक्त्वा चाभ्यागतो गृहम् भारतीय मनीषा के परम पंडित…

के सी त्यागी

जदयू के वरिष्ठ नेता के. सी. त्यागी क्यों कह रहे हैं कि “संभव नहीं जाति की राजनीति को रोकना”

संभव नहीं जाति की राजनीति को रोकना : के. सी. त्यागी रमेश कुमार मिश्र राष्ट्रीय हिंदी अखबार दैनिक जागरण के संपादकीय पेज पर 31 अगस्त 2024 को के सी त्यागी…

archana kaamath kee vaapasee

अर्चना कामथ की वापसी

अरुणाकर पाण्डेय पेरिस ओल्यमपिक्स खेलों में टेबल टेनिस के खेल में अर्चना कामथ का नाम उभर कर आया जब जर्मनी के विरुद्ध टीम इवेंट क्वार्टरफाइनल में वे एकमात्र भारतीय विजेता…

साहित्यिक

साहित्यिक विभूतियों के स्मृति स्वरूप

अरुणाकर पाण्डेय किसी साहित्यिक विभूति को याद रखने का संभवतः सबसे अच्छा माध्यम उसका साहित्य ही हो सकता है क्योंकि वही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनता है | यदि इतना…

jayadrath vadh ke ek prasang par

हे पार्थ ! प्रण पालन करो देखो अभी दिन शेष है

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री मैथिलीशरण गुप्तजी की रचना जयद्रथ वध के एक प्रसंग पर अरुणाकर जी ने यह आलेख लिखा है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका का उल्लेख…

Hari Shankar Parsai

साहित्यिक पत्रिकाएँ ब्राह्मण होती हैं,व्यंग शूद्र माना गया है : हरिशंकर परसाई

गत 22अगस्त को परसाई जी के सौ वर्ष हो गए हैं। हिंदी जगत में बहुत धूमधाम से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए,इसकी अपेक्षा और आशा भी थी । इस अवसर…

सनातन

ठाकुर प्रसाद मिश्र सनातन सर्वत्र है सम्पूर्ण धारा सनातन युक्त है.जहाँ तक प्रकृति एवं पुरुष का संयोजन है वहाँ तक सनातन है.हम भाग्यशाली हैं कि इसका प्रमुख चिंतक हमारा देश…