आलेख

निर्धन पुरुष का त्याग वेश्या भी कर देती है –आचार्य चाणक्य 

निर्धन पुरुष का त्याग वेश्या भी कर देती है रमेश कुमार मिश्र निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्. खगाय: वीतफलं वृक्षं भुक्त्वा चाभ्यागतो गृहम् भारतीय मनीषा के परम पंडित…

जदयू के वरिष्ठ नेता के. सी. त्यागी क्यों कह रहे हैं कि “संभव नहीं जाति की राजनीति को रोकना”

संभव नहीं जाति की राजनीति को रोकना : के. सी. त्यागी रमेश कुमार मिश्र राष्ट्रीय हिंदी अखबार दैनिक जागरण के संपादकीय पेज पर 31 अगस्त 2024 को के सी त्यागी…

अर्चना कामथ की वापसी

अरुणाकर पाण्डेय पेरिस ओल्यमपिक्स खेलों में टेबल टेनिस के खेल में अर्चना कामथ का नाम उभर कर आया जब जर्मनी के विरुद्ध टीम इवेंट क्वार्टरफाइनल में वे एकमात्र भारतीय विजेता…

साहित्यिक विभूतियों के स्मृति स्वरूप

अरुणाकर पाण्डेय किसी साहित्यिक विभूति को याद रखने का संभवतः सबसे अच्छा माध्यम उसका साहित्य ही हो सकता है क्योंकि वही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनता है | यदि इतना…

हे पार्थ ! प्रण पालन करो देखो अभी दिन शेष है

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री मैथिलीशरण गुप्तजी की रचना जयद्रथ वध के एक प्रसंग पर अरुणाकर जी ने यह आलेख लिखा है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका का उल्लेख…

साहित्यिक पत्रिकाएँ ब्राह्मण होती हैं,व्यंग शूद्र माना गया है : हरिशंकर परसाई

गत 22अगस्त को परसाई जी के सौ वर्ष हो गए हैं। हिंदी जगत में बहुत धूमधाम से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए,इसकी अपेक्षा और आशा भी थी । इस अवसर…

सनातन

ठाकुर प्रसाद मिश्र सनातन सर्वत्र है सम्पूर्ण धारा सनातन युक्त है.जहाँ तक प्रकृति एवं पुरुष का संयोजन है वहाँ तक सनातन है.हम भाग्यशाली हैं कि इसका प्रमुख चिंतक हमारा देश…

हजारीप्रसाद जी का गप्पी मन

आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की जयंती पर विशेष अरुणाकर पाण्डेय लेकिन हिंदी साहित्य,भाषा और अध्यापन के इतिहास में एक गुरु ऐसे भी हुए जिनकी ख्याति जितनी ही उनके गम्भीर शोध कार्य,…

किताब उनचास लाख की

अरुणाकर पाण्डेय एक ऐसी किताब जिसकी कहानी सर्वविदित हो, आखिर कितने मूल्य में बिक सकती है ? इसके साथ ही यह विचार किया जाए कि कोई ऐसी किताब क्यों खरीदेगा…

जब शरतचंद्र ने अमृतलाल नागर को लिखना समझाया

(हिंदी के प्रसिद्ध साहित्यकार अमृतलाल नागर की जयंती के अवसर पर विशेष) अरुणाकर पाण्डेय हिंदी साहित्य की दुनिया में अमृतलाल नागर की उपस्थिति ऐतिहासिक महत्व की है क्योंकि उन्होंने तुलसीदास…