कविता

राजनीतिज्ञ

राजनीतिज्ञ

ठाकुर प्रसाद मिश्र रहे सदा शुभ तुम्हें तुम्हारी राजनीति य़ह हमें हमारी रंक नीति ही भाने दो। जहाँ रिक्त हो जाए तुम्हारा अक्षय तरकश, वह अनचाही स्थिति अब मत आने…

एकाकी

एकाकी

विशाखा गोयल मैंने ऊंची चढ़ाई देखी देखी फिसलती ढलाने भी, ठिठकना, थमना, गिरना देखा गिरकर देखीं उड़ानें भी, सफर देखा, देखे मुसाफिर और उनके ठिकाने भी, पीडा, रुदन, अफसोस देखा…

तुलसी का मानस 

तुलसी का मानस 

ठाकुर प्रसाद मिश्र लोक तम हारक उद्धारक अज्ञानिन को । ज्ञानिन को निर्गुण से सगुण पर चलावतो ।। कलि के कराल अनुचरन मुख काठ देत । राव और रंक संबंध…

कामना

कामना

ठाकुर प्रसाद मिश्र भावना की पुष्करणि में मन जलधि का नीर भरकर. कल्पना की डुबकियों से ढूंढ़ते मुक्ता मनोहर. काम की आसक्ति ही यदि पूर्णता का द्वार होती. कर्मफल होता…

वेदना
अपना तुम जीवन बीमा करा लो

अपना तुम जीवन बीमा करा लो

रमेश कुमार मिश्र आओ चलो अब बीमा करा लें, जिंदगी में खुशियाँ मना लें । बचत की भी कुछ बात कर लें, संग सुरक्षा साथ धर लें।। क्यों… ? सोचता…

जीवन गीत
नया विहान

नया बिहान

ठाकुर प्रसाद मिश्र कब नया बिहान होगा? देश की काया कलुष का कब पुन: अवसान होगा? मुर्ख पंडित मान खंडित शर्म नयनों से तिरोहित. त्याग सारी मान्यताएं जौ खड़े दुर्बाद…

it is not easy

आसान थोड़े ही है

विशाखा गोयल नज़रें चुराते हुए उन्हें तकना, खुद का टुकड़ों में होकर भी दिल औरों का रखना, आसान थोड़े ही है। स्याही से लिखा हुआ मिटाना, किसी फरेब को सफाई…

Loyalty