हिंदी जगत

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हम तो छात्र अभागे हैं…

रमेश कुमार मिश्र क्यों करते हो जादू टोना, क्यों देते हो झूठा खिलौना सब कुछ तो तुमने छीन लिया अब क्या पढ़ना भी छीनोगे हम तो छात्र अभागे हैं अभी…

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ग़ज़ल

बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…

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स्मृति शेष बाबाजी

अंशुमान एस०द्विवेदी हमारे रामलला वैकुंठ में जब रामलला से मिले होंगे तो क्या बात कर रहे होंगे..? शायद बाबा रामजी से बहुत शांत आवाज़ में बात कर रहे होंगे… बिना…

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कोठे वाली

रमेश कुमार मिश्र (लेखक) रजनी बाई औरों के साथ छज्जे पर खड़ी होकर ग्राहकों को अपने जिस्म का नूरे व्यापार करने को कभी शरीर के नाजुक अंगों को मटकाकर तो…

श्रद्धांजलि
हमने कब चाहा

ट्वायलेट गंदा है

भारत में आज भी सरकारी अस्पतालों के ट्वायलेट बद से बदतर हैं … रमेश कुमार मिश्र इसे विडंबना कहें या अनदेखी समझ नहीं आता कि आजादी के पचहत्तर वर्ष बाद…

वतन के लाल
सिंदूर