कविता

यह सेतुबंध! 

यह सेतुबंध! 

अरुणेश मिश्र यह सेतुबंध ! किस मेधावी अभियंता ने कर सुरुचिपूर्ण इसका प्रबंध । बतला दी तीनो लोकों में भगवान राम की ही सुगंध । यह सेतुबंध ! यह सेतु…

राम नहीं है आग सुनो

राम नहीं है आग सुनो

रमेश कुमार मिश्र राम नहीं हैं आग सुनो, हैं राम ऊर्जा धारा | पिंड- पिंड में राम विराजें, है ब्रहमाण्ड राममय सारा || विंदु राम हैं, सिंधु राम हैं, राम…

राम नहीं है आग सुनो

प्रार्थना

रमेश कुमार मिश्र मन मानस में हरि भक्ति बसी | अब चित्त विषय रस हेरत नाहीं || रसना रसिका बनी रामहिं की | अब दूजा नाम कहावत नाहीं || नयनन…

अपना दर्द नहीं लिख पाता

अपना दर्द नहीं लिख पाता

अरुणेश मिश्र अपना दर्द नही कह पाया सबका दर्द सदा गाया है । जब देखी वेदना विश्व की लगा हर व्यथा में माया है । चिंतन में जो व्यस्त बहुत…

धैर्य
तिरंगा

तिरंगा

रमेश कुमार मिश्र खिली है फूलों से मेरी धरती सुंदर सुहानी, अंबर चूमे इस माटी को लेकर मीठा पानी, भारवि, दंडी ,कालिदासा ,बाल्मीकि विज्ञानी, संत कबीरा, तुलसीदासा ,मीरा दिवानी, भाई…

अखबार
विकास आजतक 

विकास आजतक 

ठाकुर प्रसाद मिश्र आदर्शों की चिता जल रही, संस्कृति लूट रहे मतवाले. जिसको नंदन वन समझा था, सारे फूल हैं काले – काले . जयकारों में चीत्कार है, ज्वलनशील बन…

चातक
हिंदी है तो हम हैं

हिंदी है तो हम हैं

रमेश कुमार मिश्र हिंदी है तो हम हैं, यह भाव सदा उर मध्य बसे हिंदी | बहु चित्त चरित्र बाहक हिंदी, तन -मन हिंदी जीवन हिंदी|| कहीं रासो राज कही…