खोए हुए कोई
डा. अरुणाकर पाण्डेय किसी विचारधारा के सांचे में ना ढाल सके जाने वाले सांस्कृतिकर्मी,भाषा सेवी और प्रचारक अक्सर उस नोटिस की तरह भटकते रहते हैं जिन्हें कोई लेना नहीं चाहता…
डा. अरुणाकर पाण्डेय किसी विचारधारा के सांचे में ना ढाल सके जाने वाले सांस्कृतिकर्मी,भाषा सेवी और प्रचारक अक्सर उस नोटिस की तरह भटकते रहते हैं जिन्हें कोई लेना नहीं चाहता…
संपादकीय टिप्पणाी— रचना के सागर में असंख्य रचानाएं प्रसंगिक बनकर मानव समाज को नित नई दिशा उर्जा और समाधान भी देती रहती हैं । इस क्रम में प्रति दिन अनेक…
रमेश कुमार मिश्र निर्भय होकर पथ चलना है तो, निज कर फरसा रखना होगा… निज वजूद में जीवित रहना है तो दुश्मन से लड़ना होगा… जहाँ नीति नहीं, जहाँ नियम…
रमेश कुमार मिश्र क्यों करते हो जादू टोना, क्यों देते हो झूठा खिलौना सब कुछ तो तुमने छीन लिया अब क्या पढ़ना भी छीनोगे हम तो छात्र अभागे हैं अभी…
बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…
अंशुमान एस०द्विवेदी हमारे रामलला वैकुंठ में जब रामलला से मिले होंगे तो क्या बात कर रहे होंगे..? शायद बाबा रामजी से बहुत शांत आवाज़ में बात कर रहे होंगे… बिना…
अरुणाकर पाण्डेय कुछ भी तो नहीं लिखना था न कोई शब्द याद रखना था न कोई अर्थ ढूंढना था सिर्फ लेनी थी थोड़ी सी साँस पीना था थोड़ा पानी तकिए…
रमेश कुमार मिश्र (लेखक) रजनी बाई औरों के साथ छज्जे पर खड़ी होकर ग्राहकों को अपने जिस्म का नूरे व्यापार करने को कभी शरीर के नाजुक अंगों को मटकाकर तो…
अश्रुपूरित नमन है तुमको हे देवता । गगन भी मगन है पा तुमको हे देवता ।। यूं तो आते हैं जग में मनुज बनकर सभी । कोई-कोई ही होता है…
रमेश कुमार मिश्र हमने कब चाहा जीत हमीं को मिले , जीत में तेरे जीत छुपी है मेरी । हमने कब चाहा शोहरत हमीं को मिले , तेरी शोहरत में…