आलेख

"फिर हिंदी की किताबें कौन पढ़ेगा ?"  डॉक्टर रामविलास शर्मा

हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक डॉक्टर रामविलास शर्माजी की जयंती के अवसर पर अरुणाकर जी का आलेख

“फिर हिंदी की किताबें कौन पढ़ेगा ?” डॉक्टर रामविलास शर्मा हिंदी के वरिष्ठ आलोचक डॉक्टर रामविलास शर्मा जी ने यह प्रश्न सन् 93 में एक साक्षात्कार में उठाया था ।…

मानसिक स्वास्थ्य के लिए विवेकानंद जी के विचार आज भी प्रासंगिक

मानसिक स्वास्थ्य के लिए विवेकानंद जी के विचार आज भी प्रासंगिक

डॉ मनोज कुमार तिवारी , वरिष्ठ परामर्शदाता एआरटी सेंटर, एस एस हॉस्पिटल, आईएमएस, बीएचयू, वाराणसी आधुनिक समय में भी स्वामी विवेकानंद के एक-एक शब्द दुनिया भर में लोगों को प्रेरित…

द्वंद्व और आचार्य रामचंद्र शुक्ल

द्वंद्व और आचार्य रामचंद्र शुक्ल

अरुणाकर पाण्डेय आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने चिंतन में द्वंद्व को पर्याप्त महत्व दिया है जो उनके लेखन में अक्सर उभरता है।एक जगह उन्होंने कहा भी है कि – “अनुभूति…

प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष 

प्रेमचंद जी की पुण्यतिथि के अवसर पर विशेष 

उनकी स्मृति – ‘हंस’ आज भी जीवित है, परन्तु ‘हंस’ का वह मोती कहाॅ‌ ?” ये उद्गार कथा सम्राट प्रेमचंद जी की पत्नी श्रीमती शिवरानी देवी द्वारा उनके देहावसान के…

द्वंद्व और आचार्य रामचंद्र शुक्ल

आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी की जयंती  के अवसर पर अरुणाकर जी का आलेख विशेष रूप से 

आचार्य शुक्ल की अनूदित कृति : आदर्श जीवन हिंदी की आधारशिला रखने में आचार्य रामचंद्र शुक्ल का योगदान ऐतिहासिक माना जाता है। उन्हें हिंदी के आलोचक,निबन्धकार और इतिहासकार के रूप…

महात्मा गांधी

गांधीजी के राम : एक सांस्कृतिक-विमर्श

अरुणाकर पाण्डेय रामनाम से गांधीजी का पहला परिचय उनकी धाय रंभा के कारण हुआ जिसने उन्हें बताया था कि भूतप्रेत का इलाज रामनाम है ।इस तरह देखें तो रामनाम का…

गोविंद बल्लभ पंत

गोविंद बल्लभ पंत पर प्रकाश झा का एक यादगार वृत्तचित्र

अरुणाकर पाण्डेय एक समय था जब दूरदर्शन बहुत महत्वपूर्ण वृत्तचित्र दिखाया करता था जो मेरे लिए दृश्य निबंध का काम करता था। उनमें विचार और ज्ञान पाया जाता था और…

भीख मांगते हुए हाथ

भीख मांगते हुए हाथ

अरुणाकर पाण्डेय मुझे याद है मैं पिछली बार भागा था भीख मांगते उसके हाथों से जब मैं शॉपिंग करना चाह रहा था जितनी स्थिरता उसकी आखों में थी हाथ में…

जब कविता ने कवि को बादशाह की कैद से छुड़ाया

जब कविता ने कवि को बादशाह की कैद से छुड़ाया 

अरुणाकर पाण्डेय बात सत्रहवीं शती की है । पुहकर नाम के एक कवि थे जो मूलतः मैनपुरी के परतापुर के रहने वाले थे और जीवन के बाद के दिनों में…

पुस्तकों के लिए

पुस्तकों के लिए

अरुणाकर पाण्डेय लगभग एक दशक पहले अमरीका की अलाबामा स्थित एथेंस लाइमस्टोन पब्लिक लाइब्रेरी की एक अनूठी और विचारणीय खबर सामने आई थी | इस पुस्तकालय में लगभग दो लाख…