हिंदी जगत

नारी
एक सच
राजनीतिज्ञ

राजनीतिज्ञ

ठाकुर प्रसाद मिश्र रहे सदा शुभ तुम्हें तुम्हारी राजनीति य़ह हमें हमारी रंक नीति ही भाने दो। जहाँ रिक्त हो जाए तुम्हारा अक्षय तरकश, वह अनचाही स्थिति अब मत आने…

एकाकी

एकाकी

विशाखा गोयल मैंने ऊंची चढ़ाई देखी देखी फिसलती ढलाने भी, ठिठकना, थमना, गिरना देखा गिरकर देखीं उड़ानें भी, सफर देखा, देखे मुसाफिर और उनके ठिकाने भी, पीडा, रुदन, अफसोस देखा…

विजयदशमी दुर्गा दशहरा

विजयदशमी दुर्गा दशहरा

ठाकुर प्रसाद मिश्र देवासुर संग्राम की अनेक कथाएं पुराणो में भरी पड़ी हैं। जिसमें तप बल से प्रबल हुए आसुरी प्रवृत्ति के योद्धा। मानव सृष्टि से लेकर देवलोक को सताने…

सस्ती जिंदगी
महर्षि वशिष्ठ एवं ऋषि विश्वामित्र

महर्षि वशिष्ठ एवं ऋषि विश्वामित्र

ठाकुर प्रसाद मिश्र प्राचीन काल की बात है सतयुग का प्रथम चरण था, सम्पूर्ण सृष्टि सत्य स्वरूप थी। उस समय कोई भी बलवान व्यक्ति राज्य एवं प्रजा का पालन करता…

"फिर हिंदी की किताबें कौन पढ़ेगा ?"  डॉक्टर रामविलास शर्मा

हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक डॉक्टर रामविलास शर्माजी की जयंती के अवसर पर अरुणाकर जी का आलेख

“फिर हिंदी की किताबें कौन पढ़ेगा ?” डॉक्टर रामविलास शर्मा हिंदी के वरिष्ठ आलोचक डॉक्टर रामविलास शर्मा जी ने यह प्रश्न सन् 93 में एक साक्षात्कार में उठाया था ।…

द्वंद्व और आचार्य रामचंद्र शुक्ल

द्वंद्व और आचार्य रामचंद्र शुक्ल

अरुणाकर पाण्डेय आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने चिंतन में द्वंद्व को पर्याप्त महत्व दिया है जो उनके लेखन में अक्सर उभरता है।एक जगह उन्होंने कहा भी है कि – “अनुभूति…

तुलसी का मानस 

तुलसी का मानस 

ठाकुर प्रसाद मिश्र लोक तम हारक उद्धारक अज्ञानिन को । ज्ञानिन को निर्गुण से सगुण पर चलावतो ।। कलि के कराल अनुचरन मुख काठ देत । राव और रंक संबंध…