हिंदी जगत

साहित्यिक

साहित्यिक विभूतियों के स्मृति स्वरूप

अरुणाकर पाण्डेय किसी साहित्यिक विभूति को याद रखने का संभवतः सबसे अच्छा माध्यम उसका साहित्य ही हो सकता है क्योंकि वही उसकी सबसे बड़ी पहचान बनता है | यदि इतना…

सुरमयी शाम
jayadrath vadh ke ek prasang par

हे पार्थ ! प्रण पालन करो देखो अभी दिन शेष है

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर श्री मैथिलीशरण गुप्तजी की रचना जयद्रथ वध के एक प्रसंग पर अरुणाकर जी ने यह आलेख लिखा है जिसमें भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका का उल्लेख…

Shri Krishna Aarti

श्रीकृष्ण आरती

श्रीकृष्ण आरती : आरति कीजै नंद ललन की लीलाधर प्रभु दुष्ट दलन की ठाकुर प्रसाद मिश्र आरति कीजै नंद ललन की लीलाधर प्रभु दुष्ट दलन की | अग जग देखि…