हिंदी जगत

Swachh Bharat Abhiyan

सिंग्ल यूज प्लास्टिक त्यागो

स्वच्छ भारत ठाकुर प्रसाद मिश्र सिंगल यूज प्लास्टिक त्यागो, यह जीवन पर भारी है | अगणित दुर्गुण का यह स्वामी इससे जगत दुखारी है || सर सरिता सागर तक दूषित…

RajBhsha hindi glory हिंदी महिमा

हिंदी महिमा

हिंदी दिवस के शुभ अवसर पर भावबोहित शुभकामनाएं ठाकुर प्रसाद मिश्र लिपि देवनागरी, अमिय गागरी, शब्द सागरी जय हिंदी। तुम युग प्रत्याशा राष्ट्र की भाषा, भारत माँ मस्तक विंदी।। तुम्हें…

सुनो ध्यान से तुम आ जाओ

सुनो ध्यान से तुम आ जाओ

मोबाइल से चैट न करना अरुणेश मिश्र कौन जानता दर्द किसी का क्या लेना क्या देना है ? कैसे किसका जीवन चलता कैसा साग चबेना है ? कितने दिन से…

वि गजानन माधव मुक्तिबोध

हिंदी कवि गजानन माधव मुक्तिबोध जी की पुण्यतिथि के अवसर पर                      

मुक्तिबोध जी की कविता ‘बेचैन चील’ अरुणाकर पाण्डेय मुक्तिबोध हिंदी के एक ऐसे विरले साहित्यकार हैं जिन्होनें हिंदी साहित्य के चलन को ही बदल कररख दिया | उदाहरण के लिए…

facts of life

जीवन के हकीकत

जीवन के हकीकत को बयां करती हुई मेरी रचना अनुज परीक्षित पाण्डेय नखरे हैं किस बात के पगले,किसका तुझे गुमान रे तेरी भी डोली जाएगी,आखिर में शमसान रे।। माया का…

भारतेंदु दिवस

हिंदी नयी चाल में ढली

भारतेंदु विशेष रमेश कुमार मिश्र उत्तर प्रदेश के काशी में 9 सितंबर 1850 को जन्मे भारतेंदु हरिश्चन्द्र का साहित्यक योगदान सदैव स्तुत्य है. कम समय के जीवन में बड़े कार्यों…

Shakespeare in Banaras

शेक्सपियर इन बनारस  

शेक्सपियर इन बनारस (व्यंग्य) अरुणाकर पाण्डेय दुनिया में जादू नाम की एक चीज होती है | इसी के कारण इतिहास ससपेंड हो गया और वह भी ऐन होली के दिन…

Amit Shah official language

संसदीय राजभाषा समिति के पुनः अध्यक्ष चुने गए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह

किसी भी भारतीय भाषा से स्पर्धा के बिना हिंदी की स्वीकार्यता को बढ़ाना टीम कहानीतक–नई सरकार के गठन के बाद संसदीय राजभाषा समिति की पुनर्गठन बैठक में केंद्रीय गृह और…

भारतेन्दु हरिश्चंद्र

भारतेंदु दिवस का एक अर्थ स्त्री आधुनिकीकरण भी है

भारतेंदु दिवस के अवसर पर विशेष अरुणाकर पाण्डेय पिछले कई दिनों से स्त्री अपराध से संबंधित मुद्दे भारत के मानस और राजनीति का केंद्र बने हुए हैं | स्त्री लगातार…

beauty of sign

संकेत का सौंदर्य

एहसान का भार दुनिया के सभी भारों से भारी होता है रमेश कुमार मिश्र शंकर बाबू चारपाई पर पड़े- पड़े रो रह थे। गर्म आंसू से गद्दे का कुछ हिस्सा…