January 26, 2026

ग़ज़ल

बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…

स्मृति शेष बाबाजी

अंशुमान एस०द्विवेदी हमारे रामलला वैकुंठ में जब रामलला से मिले होंगे तो क्या बात कर रहे होंगे..? शायद बाबा रामजी से बहुत शांत आवाज़ में बात कर रहे होंगे… बिना…