UGC का नया नियम सवर्णों में भय व चिंता पैदा कर रहा है..

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टीम कहानीतक.काम— सवर्णों की चिंता अब आक्रोश में बदलती जा रही है। उसका कारण है यू जी सी का 13 जनवरी 2026 का नोटिफिकेशन। जो कि यू जी सी के अनुसार उच्च शिक्षण संस्थानों में  हो रहे भेदभाव को खत्म करेगा.एस सी /एस टी /दिव्यांग /ई डब्ल्यू एस और ओबीसी वर्ग को सामान्य वर्ग के द्वारा किए गए दुर्व्यवहार  से प्रोटेक्शन देगा । सवर्ण वर्ग के लोगों का मानना है कि यू जी सी का यह नया नियम हम सवर्णों के बच्चों के भविष्य के साथ एक पक्षीय खिलवाड़ है। जहाँ शिकायत कर्ता की शिकायत यदि झूठी निकली तो उनके लिए कोई दंडविधान इस

कानून में है ही नहीं । अब ऐसे में जब भी कोई किसी सवर्ण वर्ग के छात्र को बदले की भावना से परेशान करना चाहेगा तो वह उसकी शिकायत कर देगा ,चूंकि नियम में सवर्ण वर्ग के छात्रों की सुरक्षा को लेकर इस नियम सें कोई में कोई प्राविधान है ही नहीं तो उस सवर्म छात्र का कैरियर आसानी से चौपट हो जाएगा । UGC के नये नियम में सवर्ण वर्ग की चिंता उनकी अपनी लड़कियों को लेकर है । इस कानून की आड लेकर  कोई भी उनको ब्लैकमेल कर सकता है। उनके शोषण की संभावनाओं से भी  इंकार नहीं किया जा सकता है सबसे ज्यादा खतरा शारीरिक शोषण का भी हो सकता है।

यू जी सी द्वारा बनायी गयी इक्विटी कमेटी क्या इन सवर्ण छात्रों के प्रति न्याय कर पाएगी…? शायद नहीं यही भय सवर्णों को भयाक्रांत किए जा रहा है।

एक बात और हम जिस समाज में रहते हैं वहां अच्छे और बुरे सब तरह के लोग रहते ही हैं,। अब ऐसे में एस सी /एस टी /ई डबल्यू एस/  दिव्यांग और ओ बी सी वर्ग ही शोषित हो सकता है, यह कैसे मान लिया जाए. क्या यह एक तरफा कानून नहीं है? शायद है सवर्ण वर्ग ऐसा मानकर चल रहा है यह उसके आक्रोश से समझा जा सकता है.

बहुत से सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों में सवर्ण कहते हुए सुना जा सकता है कि अभी तो कुछ दिन पहले ही हमसे कहा जा रहा था सबका साथ -सबका विकास , एक हैं तो सेफ हैं, फिर यह हमें ापस में लडाने वाला नियम क्यों लाया गया है ? सवर्ण समाज अपने साथ हो रहे इस तरह के भेद भाव पर सवाल पूछ रहा है कि सबका साथ सबका विकास , एक हैं तो सेफ हैं कहने वाले लोग इस भेद भाव पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं ? समता और समनता के लिए स्वस्थ माहौल चाहिए होता है यहाँ तो माहौल ही गरम किया जा रहा है।

यू जी सी से सवर्ण समाज के कुछ सवाल —

1- सवाल यह कि आपकी नजर में छात्रों  में भेद भाव क्यों ? 

2- सवाल यह कि वह कौन सा मानक है कि सवर्ण छात्र ही अपराधी हो सकता है, यह सवाल इसलिए भी कि आपके नियम का सीधा -सीधा यही अर्थ निकलता है।

3– सवाल यह कि इस संभावना से कैसे इंकार किया जा सकता है कि एक सवर्ण छात्रा पर यदि कोई एस सी /एस टी / ओ बी सी और ई डबल्यू एस छात्र किसी अपने खास मनोकामना पूर्ति के लिए जब चाहे आरोप लगा दे । जबकि आप द्वारा तैनात इक्विटी कमेटी में एक भी सदस्य सवर्ण समाज से नहीं होगा फिर वह कमेटी उस लड़की को ब्लैक मेल करके उसका शोषण नहीं करेगी इस बात की क्या गारंटी होगी और इस दशा में फिर UGC सवर्ण जाति के छात्लोर छात्गोंराओं के साथ न्याय कैसे करेगा? 

4- सवाल यह भी कि अब कोई सवर्ण वर्ग का टीचर कैसे पढ़ाएगा ? आपके नियम किसी कट्टर पंथी के पंथ जैसे भी तो साबित हो सकते जहाँ सिर्फ नियम थोपे जाते हैं वहां सवाल पूछने और बोलने की आजादी सामने वाले को नहीं होती है। कट्टर पंथ सदैव एक सभ्य़ समाज के लिए घातक होता है। तो  जरूरी है कि देश के शिक्षण संस्थानों की गरिमा बनी रहे कारण कि इन्हीं शिक्षण संस्थानों में देश का भविष्य पलता है ।

शांति तभी संभव है जब समानता की जमीन तैयार करने की पहल हो ।

यह नियम कहीं न कहीं समाज में एक तरफ डर का माहौल पैदा कर रहा है तो दूसरी तरफ नफरत के बीज बोने का काम कर रहा है। यहां ध्यान यह भी रखना होगा कि कुछ लोग सत्ता के खातिर माहौल बिगाडने के फिराक में भी सक्रिय रहते हैं उन पर भी निगाह रखना होगा ।

सरकार का काम सब तरफ शांति और सौहार्दपूर्ण वातावरण तैयार करते हुए  प्रतिभा के पौधे तैयार करने पर होना चाहिए ऐसे नियम कानून से ब जो कि सामाजिक सांति के लिए घातक हों उनसे बचना चाहिए ऐसा कई बुदधि जीवी कहते हुए सुने जा सकते हैं । जब सरकार का मतलब ही जनता का शासन जनता के द्वारा है तो किसी एक नीति या नियम से बवंडर खडा करने का औचित्य समाझ नहीं आता है ।

भारत की संस्कृति का मूलमंत्र है भाईचारा । जिस तरह संगम या देश की पवित्र नदियों में सबी जाति के लोग बिना भेदभाव स्नान करने का सुख पाकर प्रसन्न होते हैं उसी प्रकार हमारे शिक्षण संस्थानों में भी सभी जाति व वर्ग के लोग विद्या रूपी गंगा में बिना भेदभाव औऱ बदले की भावना से रहित डुबकी लगाकर बाहर आएं अपने देश व समाज के लिए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें टीम कहानीतक.काम इसी भावना के साथ राष्ट्र हित में समर्पित बस यी कामना करती है कि —ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः ॥

ध्यातव्य है कि अधिकारों के लिए मंग जायज है और यह होनी ही चाहिए लेकिन उसका मार्ग सदैव शांति के दरवाजे होकर गुजरे तभी एक राष्ट्र विकास की नई ऊंचाइयों के कीर्तिमान स्थापित कर सकता है ।

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