रमेश कुमार मिश्र

क्यों करते हो जादू टोना,
क्यों देते हो झूठा खिलौना
सब कुछ तो तुमने छीन लिया
अब क्या पढ़ना भी छीनोगे
हम तो छात्र अभागे हैं
अभी नींद में आधे हैं…?
कलम हमारा संकल्प पत्र है
ज्ञान हमारा संबल है
सुन लो राजा कान खोलकर
ओढ़ना आरक्षण का
नहीं हमारा कंबल है.
वसुधैव कुटुबंक हम गाते हैं
सबको गले लगाते हैं
सीमा पर तत्पर देश के खातिर
हंसते-हंसते बलि बेदी पर भी चढ़ जाते हैं …
सुन लो राजा कान खोलकर
हम तो छात्र अभागे हैं
अभी नींद में आधे हैं..
ऊँ शांति हैं बोलते ऊं शांति हैं लिखते .
ऊं शांति श्री की माला जपते हम
शांति हमारा परम धरम है,
हाथ हमारे तभी कलम है.
सुन लो राजा कान खोलकर
हम तो छात्र अभागे हैं
अभी नींद में आधे हैं…
रमेश कुमार मिश्र
कवि/लेखक- दिल्लीविश्वविद्यालय दिल्ली से हिंदी में परास्नातक व हिंदी पत्रकारिता परास्नातक डिप्लोमा हैं
