रमेश कुमार मिश्र

निर्भय होकर पथ चलना है तो,
निज कर फरसा रखना होगा…
निज वजूद में जीवित रहना है
तो दुश्मन से लड़ना होगा…
जहाँ नीति नहीं, जहाँ नियम नहीं
जहाँ साजिश की काली राते हैं.
वहाँ सूरज की लाली बनकर तुमको,
सूरज जितना जलना होगा.
निर्भय होकर चलना है तो
निज कर फरसा रखना होगा…
राजनीति का स्याह चक्र जब,
शांत समाज को भड़काए,
तब शास्त्र की मर्यादा लेकर,
तुम्हें शस्त्र वार करना होगा…
निर्भय होकर पथ चलना है…
जब तक विनाश नहीं होता,
सृजन कहाँ ही संभव है.
इनका समय हुआ पूरा अब
दूजा कहां असंभव है.
निर्भय होकर पथ चलना है तो…
ज्ञान तुम्हारा संबल है वीरों
मौन तुम्हारा अतिबल है.
शिखा तुम्हारी आन है वीरों
इसका मान तुम्हें रखना होगा. .
निर्भय होकर पथ चलना है तो
निज कर फरसा रखना होगा…
रचनाकर — रमेश कुमार मिश्र
कवि/लेखक- दिल्लीविश्वविद्यालय दिल्ली से हिंदी में परास्नातक व हिंदी पत्रकारिता परास्नातक डिप्लोमा हैं
