लोकतंत्र की मर्यादा: ग्राहक बनकर सौदा न करें, मतदाता बनकर राष्ट्र का भविष्य चुनें

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​[नई दिल्ली/ गाजियाबाद कहानीतक.काम ब्यूरो] -​चुनाव लोकतंत्र का महापर्व है, लेकिन आजकल इस पर्व में लोकलुभावन वादों की गूंज इतनी तेज हो गई है कि असली मुद्दे कहीं खो से गए हैं। राजनीतिक दल तरह-तरह की मुफ्त योजनाओं और उपहारों की पेशकश कर रहे हैं। ऐसे माहौल में एक नागरिक के तौर पर हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हम खुद को इन प्रलोभनों से कैसे बचाएं। सवाल यह है— क्या हम अपना प्रतिनिधि चुन रहे हैं, या चंद तात्कालिक फायदों के लिए अपने वोट का सौदा कर रहे हैं?

​आज कहानीतक.काम पर हमारा मुद्दा स्पष्ट है: ‘मतदाता बनें, ग्राहक नहीं‘।

ग्राहक बनाम मतदाता: फर्क समझना जरूरी

​एक ग्राहक की सोच ‘लेन-देन’ तक सीमित होती है। वह सोचता है, “मुझे अभी क्या फायदा मिल रहा है?” लेकिन लोकतंत्र लेन-देन की जगह नहीं, बल्कि भागीदारी और जिम्मेदारी का नाम है।

​जब राजनीतिक दल लुभावने वादे करते हैं और हम केवल उन फायदों को देखकर वोट देते हैं, तो अनजाने में हम मतदाता के ऊंचे दर्जे से नीचे उतरकर एक ‘लाभार्थी’ या ‘ग्राहक’ की भूमिका में आ जाते हैं। हम अपने पांच साल के भविष्य और देश की प्रगति को नजरअंदाज कर देते हैं।

​’ग्राहक’ बनने का नुकसान

​जब वोट किसी ‘तोहफे’ या ‘मुफ्त योजना’ के बदले दिया जाता है, तो सवाल पूछने का नैतिक अधिकार कमजोर पड़ जाता है। अगर चुनाव का आधार सिर्फ यह हो कि “किसने मुझे ज्यादा दिया”, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और रोजगार जैसे बुनियादी और गंभीर मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। एक जिम्मेदार नागरिक अपने “आज” के छोटे फायदे के लिए आने वाली पीढ़ी का “कल” दांव पर नहीं लगाता।

​जागरूक ‘मतदाता’ की पहचान

​एक सच्चा मतदाता वह है जो भावनाओं और प्रलोभनों में बहे बिना, विवेक से फैसला लेता है। वह यह नहीं पूछता कि “मुझे अभी क्या मिलेगा?”, बल्कि वह यह देखता है कि:

​क्या उम्मीदवार के पास क्षेत्र और देश के विकास का कोई विजन है?

​क्या मुफ्त की घोषणाओं से देश की अर्थव्यवस्था पर बोझ पड़ेगा?

​क्या उम्मीदवार ईमानदार और जवाबदेह है?

​निष्कर्ष: बेंचेंगे वोट तो लगेगी पेट पर गहरी चोट इसलिए भविष्य़ को ध्यान में रखकर जिसे चुनें सही चुनें आफ सुरक्षित लोकतंत्र का भविष्य भी सुरक्षित

​लोकतंत्र की शक्ति आपकी उंगली पर लगी स्याही में है। यह कोई सौदा नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में आपकी आहुति है। आपके वोट की कीमत किसी लैपटॉप, स्कूटी , दारू की शीशी, मीट, और मुफ्त बिजली से कहीं ज्यादा कीमती है—यह आपके बच्चों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।

​इसलिए, जब आप मतदान केंद्र जाएं, तो एक स्वाभिमानी नागरिक की तरह जाएं। प्रलोभनों से ऊपर उठें। ग्राहक नहीं, एक जागरूक और जिम्मेदार मतदाता बनें।

​(ऐसी ही और महत्वपूर्ण जानकारियों के लिए पढ़ते रहें – Kahanitak.com)

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