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 अंशुमान एस०द्विवेदी

हमारे रामलला वैकुंठ में जब रामलला से मिले होंगे तो क्या बात कर रहे होंगे..?

शायद बाबा रामजी से बहुत शांत आवाज़ में बात कर रहे होंगे…

बिना कोई शिकायत, बिना कोई सवाल, अपनी खुशियां, अपनी चिंताएं व्यक्त कर रहे होंगे।

शायद कह रहे होंगे—

“मैं अपनी ज़िंदगी में जो कर पाया, किया।

अब जो अधूरा रह गया है, उसे तुम संभाल लेना।”

वो प्रभु को हमारे बारे में सब बता रहे होंगे—

कौन बाहर से हँसता है लेकिन अंदर से टूट जाता है,

कौन ज़िम्मेदारियों के नीचे दबकर भी कुछ नहीं कहता,

कौन रोज़ याद करके चुपचाप रो लेता है।

शायद कह रहे होंगे—

“इन्हें थोड़ा और सब्र दे देना,

थोड़ी और ताक़त दे देना।

ये दिखाते नहीं, पर बहुत याद करते हैं।”

हो सकता है वो राम जी से हमारी गलतियों के लिए माफ़ी माँग रहे हों—

“बच्चे हैं, कभी रास्ता भटक जाएँ तो संभाल लेना।”

और शायद भगवान उनसे कह रहे हों—

“इनमें तुम्हारी परवरिश दिखती है,

ये गिरेंगे, मगर टूटेंगे नहीं।”

बाबा शायद ये भी कह रहे होंगे—

“कभी-कभी इन्हें एहसास दिला देना

कि मैं आसपास ही हूँ—

किसी दुआ में,

किसी सपने में,

या किसी मुश्किल वक़्त में अचानक मिली हिम्मत में।”

और जब भगवान पूछते होंगे—

“कुछ और?”

तो शायद बाबा बस इतना कहते होंगे—

“बस इतना कि ये अकेले न महसूस करें।”

क्योंकि बाबा चाहे ज़मीन पर न हों,

पर उनकी बातें, उनकी दुआएँ,

आज भी हमारी ज़िंदगी के हर मोड़ पर

हमारे साथ चल रही होती हैं।

वहाँ बाबा भगवान से कोई बड़ी बात नहीं कर रहे होंगे—

शायद कह रहे होंगे, वो बस जिक्र कर रहे होंगे, अपने खेत और खलिहानों का, मकान और दुकानों का, अड़ोसी- पड़ोसी, नात-बात, रिश्तेदार-समाज, अपने सभी चेलों और तमाम दुनिया भर की बातों का। 

वो प्रभु से सबकी कुशलता और दीप्तिमान भविष्य की कामना कर रहे होंगे।

शायद पूंछ रहे हों, भगवन!

“सब ठीक हैं न? नीचे सब संभल जाएगा न?”

शायद अपने बच्चों की छोटी-छोटी बातों का ज़िक्र कर रहे हों—

किसे क्या चिंता है, कौन चुपचाप मजबूत बनने की कोशिश कर रहा है।

हो सकता है भगवान से बस इतना कह रहे हों:

“मैं तो ठीक हूँ, बस उन्हें हिम्मत देते रहना।”

और शायद राम जी मुस्कुरा कर कह रहे हों:

“चिंता मत करो, तुम्हारी दुआएँ अब भी उनके साथ हैं।”

कभी-कभी लगता है, जो हमें छोड़कर जाते हैं,

वो स्वर्ग में भी हमारी ही बातें करते रहते हैं।

 अंशुमान एस०द्विवेदी कवि /लेखक

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