रंगायन : आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज का नाट्योत्सव 

डॉ. निरंजन राव
डॉ. निरंजन राव
Arunakar pandey
डॉ. अरुणाकर पाण्डेय

हिंदी के प्रसिद्ध नाटककार,कथाकार और धर्मयुग के संपादक धर्मवीर भारती की जन्मशती के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के आत्मा राम सनातन धर्म की नाट्य समिति ‘रंगायन’ ने पाँच  दिवसीय ( 27 से 31 जनवरी 2026) ग्यारहवें रंगशीर्ष जयदेव नाट्योत्सव का आयोजन किया । इस आयोजन का ऐतिहासिक महत्व यह है कि इस वर्ष रंगायन के बाईस वर्ष पूरे हुए हैं।इस आयोजन में कॉलेज ने धर्मवीर भारती जी के सुप्रसिद्ध नाटक अंधा युग का प्रदर्शन किया जिसे खुले मन से प्रेक्षकों का प्रेम मिला । यह नाटक नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्री राम सेंटर ऑडिटोरियम में मंचित किया गया ।

 पहले दिन 27 जनवरी को नाट्योत्सव में दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. दिनेश सिंह,रंगायन के संस्थापक त्रयी – डॉ. जयदेव तनेजा, कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ज्ञानतोष कुमार झा, राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर अनामिका प्रसाद,गवर्निंग बॉडी की चेयरपर्सन प्रो. महिमा ठाकुर, शासी निकाय के पूर्व अध्यक्ष श्री पवन जग्गी,उप प्राचार्य प्रो. विनीता तुली,कॉलेज नाट्य समिति  रंगायन के संयोजक डॉ.राज कुमार भगत,एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे । नाटक के प्रदर्शन से पहले प्राचार्य प्रो. ज्ञानतोष झा ने बताया कि यह स्वप्न रंगायन ने पच्चीस वर्ष पहले देखा था कि उसे अंधा युग का मंचन करना है जो अब जाकर साकार होने जा रहा है । प्रसिद्ध रंगकर्मी जयदेव तनेजा जी ने यह रेखांकित किया कि पिछले वर्ष मोहन राकेश की शती के अवसर पर रंगायन ने ही सबसे पहले उनकी स्मृति में आयोजन की शुरुआत की थी और इस वर्ष धर्मवीर भारती की शती के अवसर पर सबसे पहले रंगायन ही अंधा युग का मंचन करने जा रहा है जो बहुत ऐतिहासिक क्षण है। इस अवसर पर दिल्ली विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री दिनेश सिंह ने धर्मवीर भारती जी को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए धर्मयुग की ऐतिहासिक भूमिका पर अपनी बात रखी और कॉलेज के महत्वपूर्ण प्रयासों पर विस्तारपूर्वक अपनी अनुशंसा दी।मंच संचालन हिंदी विभाग के प्राध्यापक डॉ.अरविन्द कुमार मिश्र ने किया

आयोजन के पहले दिन उदघाटन एवं स्वागत के बाद रंगायन द्वारा धर्मवीर भारती कृत ‘अंधा युग’ नाटक का मंचन किया गया इसका निर्देशन सुप्रसिद्ध निर्देशक रवि तनेजा ने किया । नाटक के मंचन ने प्रेक्षकों को महाभारत के अठारहवें दिन की वीभत्सता और द्वंद्व का दर्शन कराया जिसमें युद्ध,सत्ता,एकाधिकार और प्रतिशोध के तनावों को बखूबी अभिव्यक्त किया गया है। इस मंचन से भारती जी का नाटक युवाओं के बीच काफी चर्चा का विषय बना जिसे कॉलेज के विद्यार्थियों और शिक्षकों के द्वारा काफी मेहनत से प्रस्तुत किया गया ।

 नाट्योत्सव के दूसरे दिन बादल सरकार के नाटक ‘घेरा’ का मंचन श्रीराम सेंटर में किया गया जिसका निर्देशन प्रसिद्ध नाट्यक्रमी श्री अनिल रंजन भौमिक ने किया। गौरतलब है कि यह वर्ष बादल सरकार का भी जन्म शताब्दी वर्ष है |बादल सरकार का नाटक ‘घेरा’ बर्तोल्त ब्रेख्त के ‘काकेशियन चॉक सर्किल’ पर आधारित है जिसमें सत्ता, न्याय और बुद्धिजीवी वर्ग के आंतरिक सम्बन्धों का विश्लेषण करते हुए उन पर करारा व्यंग्य किया गया है| इसे निर्देशक अनिल रंजन भौमिक ने बड़ी कुशलता से संयोजित किया तथा इससे महाविद्यालय के छात्रों की भी अभिनय कला के प्रति गहरी रूचि उत्पन्न हुई जिसे दर्शकों ने भी काफी सराहा | संचालन महविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रभारी डॉ.श्रीधरम ने किया और श्री अनिल रंजन भौमिक के पचास साल के रंगकर्म को उन्होंने रेखांकित किया |

 तीसरे दिन श्रीराम सेंटर के मंच पर ही कॉलेज के छात्रों द्वारा विजय तेंदुलकर के प्रसिद्ध नाटक ‘जाति ही पूछो साधु की’ का मंचन किया गया जिसके निर्देशक वशिष्ठ उपाध्याय थे | नए छात्र अभिनेताओं को देखते हुए वशिष्ठ जी ने इसमें काफी प्रयोग किये जिससे यह नाटक सभागार में जीवंत हो उठा और गहरे उद्देश्य के साथ ही इसने दर्शकों का उम्दा और स्वस्थ मनोरंजन भी किया | प्रस्तुति के बाद दर्शकों ने इस मंचन की भी मुक्त हृदय से प्रशंसा की |

समापन दिवसों में ‘मंच नाटक’ और ‘नुक्कड़ नाटक प्रतियोगिता’ के आयोजन क्रमशः 30 व 31 जनवरी को दिल्ली के प्रसिद्ध मुक्तधारा थिएटर और महाविद्यालय के प्रांगण में सम्पन्न  हुए । इन प्रतियोगिताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय एवं दिल्ली एनसीआर के अन्य विश्विद्यालयों और संस्थाओं की टीमों ने भाग लिया।इन दोनों ही आयोजनों में भागीदारी करने वाली टीमों के छात्रों का उत्साह देखने लायक था जिसने इस नाट्योत्सव को बहुत आकर्षक बना दिया | ‘मंच नाटक’ प्रतियोगिता में लेडी श्रीराम कॉलेज और नुक्कड़ नाटक में श्याम लाल महाविद्यालय की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किए| प्रस्तुत नाटकों में समसामयिक सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों की विविधता दर्शकों को गहराई से सोचने पर विवश करती रही।इस बार विभिन्न अवसरों और मंचनों में प्रताप सहगल,अरविन्द गौड़,सुमन केशरी और संगम पाण्डेय जैसे प्रतिष्ठित रंगकर्मी,नाटककार एवं साहित्यकार भी दर्शक दीर्घा में उपस्थित रहे जिससे रंगायन के इस प्रतीष्ठित आयोजन की शोभा और बढ़ गयी |

इस पूरे आयोजन की सफलता में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. ज्ञानतोष कुमार झा का मार्गदर्शन और प्रेरणादायी नेतृत्व अत्यंत निर्णायक रहा। उनका सहयोग संस्थान की सांस्कृतिक दृष्टि और कलात्मक विकास की प्रतिबद्धता को और सशक्त करता है। नाट्योत्सव ने रंगायन की सृजनशीलता, सामाजिक प्रतिबद्धता और युवा प्रतिभाओं के कलात्मक विकास को एक साथ मंचित किया। वास्तव में यह ‘रंग, संवाद और संवेदना’ का उत्सव बन गया।

रिपोर्ट

डॉ. अरुणाकर पाण्डेय

डॉ. निरंजन राव

(समस्त छायाचित्रों के लिए हम रंगायन,श्री अनिल रंजन भौमिक,श्री वशिष्ठ उपाध्याय एवं डॉ. निरंजन राव का आभार व्यक्त करते हैं )

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