सवर्ण अभागा क्यों!
सोना चढ़ा कसौटी पर अब अपनी चमक दिखाएगा। शस्त्र, शास्त्र जिन हाथों में, क्यों भाग्य हीन कहलाएगा? अब तक थे उदार निद्रा में, त्याग मूर्ति मन भावन थे। अपनी धरती…
सोना चढ़ा कसौटी पर अब अपनी चमक दिखाएगा। शस्त्र, शास्त्र जिन हाथों में, क्यों भाग्य हीन कहलाएगा? अब तक थे उदार निद्रा में, त्याग मूर्ति मन भावन थे। अपनी धरती…
वर्ण कुवर्ण सवर्ण में बांटि कै तोड़ रहे घर की प्रभुताई. औ कैद में सिंह भुखान पड़ा सियरा सब चाटत दूध मलाई. बुद्धि विवेक से योग नहीं दुर्बुद्धि की संंतत…
सामंजस्य की सीढी के द्वारा ही शुकून के सफलता का छत प्रप्त किया जा सकता है … (रमेश कुमार मिश्र )
बाधाओं का समंदर भी साहस की उडान के समक्ष बौना होता है... (रमेश कुमार मिश्र )
डा. अरुणाकर पाण्डेय किसी विचारधारा के सांचे में ना ढाल सके जाने वाले सांस्कृतिकर्मी,भाषा सेवी और प्रचारक अक्सर उस नोटिस की तरह भटकते रहते हैं जिन्हें कोई लेना नहीं चाहता…
संपादकीय टिप्पणाी— रचना के सागर में असंख्य रचानाएं प्रसंगिक बनकर मानव समाज को नित नई दिशा उर्जा और समाधान भी देती रहती हैं । इस क्रम में प्रति दिन अनेक…
रमेश कुमार मिश्र निर्भय होकर पथ चलना है तो, निज कर फरसा रखना होगा… निज वजूद में जीवित रहना है तो दुश्मन से लड़ना होगा… जहाँ नीति नहीं, जहाँ नियम…
रमेश कुमार मिश्र क्यों करते हो जादू टोना, क्यों देते हो झूठा खिलौना सब कुछ तो तुमने छीन लिया अब क्या पढ़ना भी छीनोगे हम तो छात्र अभागे हैं अभी…
बलजीत सिंह न देखो ताज को तुम दिल्लगी से! मोहब्बत की है तुमने गर किसी से हुआ अनजाने में इक क़त्ल जिससे! छुपाता फिर रहा था मुँह सभी से! जो…
अरुणाकर पाण्डेय कुछ भी तो नहीं लिखना था न कोई शब्द याद रखना था न कोई अर्थ ढूंढना था सिर्फ लेनी थी थोड़ी सी साँस पीना था थोड़ा पानी तकिए…