अमृत कालIMAGE SOURCE GOOGLE GEMINI
THAKUR PRASAD MISHRA

वर्ण कुवर्ण सवर्ण में बांटि कै तोड़ रहे घर की प्रभुताई.

औ कैद में सिंह भुखान पड़ा सियरा सब चाटत दूध मलाई.

बुद्धि विवेक से योग नहीं दुर्बुद्धि की संंतत साख बढ़ायी.

जन जन में बैर बढ़ाई दियो यह कौन आ अमृत काल है भाई.

रचनाकार – ठाकुर प्रसाद मिश्र 

     कवि /लेखक 

प्रकाशित हिंदी उपन्यास रद्दी के पन्ने

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