
वर्ण कुवर्ण सवर्ण में बांटि कै तोड़ रहे घर की प्रभुताई.
औ कैद में सिंह भुखान पड़ा सियरा सब चाटत दूध मलाई.
बुद्धि विवेक से योग नहीं दुर्बुद्धि की संंतत साख बढ़ायी.
जन जन में बैर बढ़ाई दियो यह कौन आ अमृत काल है भाई.
रचनाकार – ठाकुर प्रसाद मिश्र
कवि /लेखक
प्रकाशित हिंदी उपन्यास रद्दी के पन्ने
