कंधार हाइजैक विमान IC-814

कंधार हाइजैक विमान IC-814

24 दिसंबर 1999 दिन शुक्रवार को भारतीय विमान IC-814 ने त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा काठमांडू (नेपाल) से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा दिल्ली के लिए 178 यात्रियों को लेकर उड़ान भरी। जिसका मुख्य फ्लाइट अटेंडेंट अनिल शर्मा तथा कप्तान देवशरण थे।

सभी यात्री यात्रा का आनंद ले रहे थे इंडियन एयरलाइंस डीवीडी के मदद से सभी यात्रियों को माउंट एवरेस्ट चोटी से रूबरू करा रही थी। बहुत सारे भारतीय यात्री थे जो नेपाल का परिभ्रमण कर वापस आ रहे थे। सभी यात्रियों के लिए टी कॉफी सर्व किया जा रहा था और एक खुशनुमा माहौल था। लेकिन यह सभी आने वाले मानव निर्मित तूफान से अनजान थे।

जैसे ही भारतीय विमान IC-814 भारतीय सीमा में प्रवेश किया तभी पांच खूंखार आतंकवादी प्लेन के सभी हिस्सों में फैल गए और बोला तुम लोगों का फ्लाइट हाईजैक हो चुका है गलती करने की कोई गुंजाइश नहीं है। यह सुनते ही सभी का दिल दहल गया सभी आतंकवादी बम तथा बंदूकों से लैस थे। दो आतंकवादी मुख्य पायलट अटेंडेंट अनिल शर्मा तथा पायलट देव शरण पर एके-47 तान कर बोला अब यह प्लेन हम लोगों के कब्जे में है कोई भी हंसियारी हुई तो बम से प्लेन उड़ा देंगे।

हाईजैकर्स ने कहा प्लेन को पाकिस्तान की लाहौर एयरवेस के तरफ चलो लेकिन शरणने चलाकी दिखाते हुए बोले उतना फ्यूल नहीं है कि लाहौर जा सकेगा लेकिन फिर हाईजैकर्स ने दबाव बनाया तब शरण ने समझाते हुए फैसला नहीं बदला और इसका सूचना भारतीय एयरवेस के पास पहुंचा दी। हाईजैकर्स अमृतसर में लैंडिंग के लिए मान गए।

आगे की घटना से पहले सभी हाईजैकर्स का नाम निम्न है –

  • इब्राहिम अतहर , पाकिस्तान के बहालपुर निवासी।
  • शाहिद अख्तर सईद , पाकिस्तान के कराची निवासी
  • सनी अहमद काजी , पाकिस्तान के कराची निवासी
  • मिस्त्री जहूर इब्राहिम , पाकिस्तान के कराची निवासी
  • शकीर , पाकिस्तान के सुक्कुर निवासी।

जैसे ही भारत सरकार तथा आम जनता को प्लेन हाईजैक का पता चला सभी को ऐसा लगा मानो पैरों तले जमीन खिसक गई। जगह जगह सरकार अटल बिहारी वाजपेई जी के खिलाफ नारे लगाए जाने लगा। विपक्ष पार्टी को भी एक बड़ा मौका हाथ लग गया। उस समय एक ही मांगा था कि जो भी भारत सरकार को चुकाना पड़े वो चुकाए लेकिन सभी लोगों को सुरक्षित वतन लाएसरकार को फैसला लेना बहुत ही मुश्किल था।

विमान IC-814 अमृतसर (भारत) में लैंडिंग:

विमान IC-814 अमृतसर हवाई अड्डे पर पहुंची भारतीय सरकार कोई भी फैसला नहीं ले पा रही थी लोगों तथा विपक्ष के दबाव से। इसकी वजह से अभी तक पंजाब सरकार आदेश का इंतजार कर रही थी। पंजाब पुलिस के सहस्त्र कर्मी सभी एयरवेस के पास तैयार थे। दिल्ली में आपदा प्रबंधन समूह ने अमृतसर हवाई अड्डे के अधिकारियों को बिना आदेश का कोई भी कदम उठाने से मना किया था। कोई मौका नहीं बन पा रहा था। इसीलिए ईंधन टैंक को विमान आईसी 814 के पास भेजा गया। पायलट को हवाई यातायात नियंत्रण के द्वारा प्लेन को धीरा करने का आदेश दिया और अचानक टैंक की भी रुक गया। तभी हाईजैकर्स को पता चल गया कि यहां कुछ गड़बड़ है और प्लेन को जबरदस्ती वहां से लाहौर की तरफ उड़ान लगवा दिया। यह एक मौका बनी थी भारत सरकार के पास लेकिन मौका गवा दिया।

लाहौर , पाकिस्तान में IC-814 का लैंडिंग:

प्लेन में लोगों के अंदर डर की वजह से चीख तक गायब हो गई थी अब प्लेन में इंधन भी समाप्त हो रहा था। जैसे ही प्लेन लाहौर हवाई अड्डे के पास पहुंचने वाली थी तब तक लाहौर हवाई अड्डे के द्वारा हवाई यातायात तथा लाइट को बंद कर दिया गया। पाकिस्तान ने डर के कारण ठुकरा दिया कि इस हाईजैक से हमें जोड़ा जा सकता है। अब यहां शरण साहब को एक लाइट दिखी उनके अनुभवों से लगा कि यह रनवे है और उतारना शुरू किया जैसे ही नजदीक आए तब तक पता चला कि यह रनवे नहीं है बल्कि सड़क है। और फिर प्लेन को उड़ा लिया।

अब कोई उपाय नहीं था जिससे प्लेन को धराशाई होने से बचाया जाए क्योंकि फ्यूल भी खत्म होने की कगार पर था। तभी अचानक लाहौर हवाई अड्डा अपना यातायात तथा लाइट शुरू किया और लैंडिंग करने की अनुमति दे दी। वहां से आईसी 814 में फ्यूल फुल कर दिया गया। पायलट के द्वारा कुछ महिलाओं तथा बच्चों को उतारने की गुहार लगाई गई थी लेकिन लाहौर अधिकारियों ने ठुकरा दिया और फिर 22:32 बजे लाहौर से उड़ान भर दी।

दुबई में IC-814 की लैंडिंग :

अभी भी सरकार फैसला लेने में व्यस्त थी। प्लेन के अंदर हो रहे दुर्व्यवहार की वजह से कुछ लोगो ने आवाज उठाया लेकिन हाईजैकर के द्वारा उन पर चाकू से वार कर डरा दिया गया जिसमें 25 वर्षीय भारतीय रिपन बहादुरी दिखाई थी लेकिन बुरी तरह चाकू से वार कर मर दिया। अब आईसी 814 विमान दुबई के अल मिन्हत एयरफोर्स हवाई अड्डे पर पहुंच चुकी थी। वहां पर उन्होंने 27 यात्रियों को छोड़ दिया जिसमे मृत रिपन भी मौजूद थे। वहा से अपहरणकर्ताओं ने पायलट से कंधार की तरफ उड़ान भरने को कही। एक बार फिर आईसी 814 उड़ान भरी।

लोगों की तथा विपक्षी दबाव की वजह से सरकार कोई भी सशक्त कदम नहीं उठा पा रही थी ।राष्ट्र से ऊंचा रखकर सभी यात्रियों को छुड़ाने तथा अपहरणकर्ताओं का डिमांड पूरा करने का सरकार ने निर्णय लिया।

IC-814 विमान की कंधार , अफगानिस्तान में लैंडिंग :

एक बार फिर विमान आईसी 814 ने अफगानिस्तान की धरती कंधार में लैंडिंग किया। तालिबान से पूर्व संपर्क न होने से भारत को उससे मदद की कोई उम्मीद नहीं थी। तालिबानी लड़ाकों ने आईसी 814 को चारों तरफ से सुरक्षा प्रदान किया हुआ था इससे संदेह हुआ की मिलीभगत का खेल है। भारतीय अधिकारियों तथा अपहरणकर्ताओं के बीच तालिबानी अधिकारी ने वार्ता के लिए हां कर दी।

हाईजैकर्स के द्वारा डिमांड:

हाईजैकर्स ने भारतीय जेलों में बंद 35 इस्लामी आतंकवादियों की रिहाई तथा 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मांग की। लेकिन भारतीय वार्ताकारों के द्वारा उनके मांगो को तीन आतंकवादियों को छोड़ने तक सीमित कर दिया। ये तीन आतंकवादी इस प्रकार है –

  • अहमद उमर सईद शेख , रिहाई के बाद डेनियल पर्ल का अपहरण तथा हत्या किया
  • मुस्ताक अहमद जरगर , रिहाई के बाद से पाकिस्तान प्रशस्ति कश्मीर में इस्लामी उग्रवादियों को प्रशिक्षित करने में मुख्य भूमिका निभाई।
  • मौलाना मसूद अजहर , रिहाई के बाद 2000 ईस्वी में जैश ए मोहम्मद आतंकवादी संगठन बनाया तथा 2001 में भारतीय सांसद हमले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह तीन खतरनाक आतंकवादियों की रिहाई के बाद 31 दिसंबर 1999 को लगभग 7 दिनों बाद सभी यात्रियों को दूसरे विमान में सुरक्षित लाया गया।

अजीत डोवाल जी का कथन:

अजीत डोभाल जी ने 2012 की एक इंटरव्यू में कहा था कि जब मैं तीनों आतंकवादियों की रिहाई के समय आईसी 814 विमान में गया और लोगों से कहा आप सभी अब सुरक्षित है बोलिए जय हिंद दो लोगों में डर की वजह से आवाज तक बंद हो गई थी। जो कि एक स्वाभाविक है जिस पर उन्होंने खेद जताया था।