जवाहरलाल नेहरु की जीवनी – jawaharlal-nehru Biography Hindi

जवाहरलाल नेहरु की जीवनी – jawaharlal-nehru Biography Hindi

जवाहरलाल नेहरू, भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे और स्वतंत्रता के पूर्व और बाद की भारतीय राजनीति में केंद्रीय व्यक्तित्व है। महात्मा गांधी के संरक्षण में, भी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के सर्वोच्च नेता के रूप में उभरे और उन्होंने 1947 में भारत को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापना से लेकर 1964 तक अपने निधन के समय तक उन्होंने शासन किया. भारत के स्वतंत्रता में उनका बहुत बड़ा योगदान है। आज इस आर्टिकल में हम आपको जवाहरलाल नेहरु की जीवनी – jawaharlal-nehru Biography Hindi के बारे में बताएंगे।

जवाहर लाल नेहरू की जीवनी — शिक्षा, इतिहास, तथ्य और जानकारी

स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री के तौर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आधुनिक भारत की नींव रखी। आधुनिक वैज्ञानिक समझ रखने वाले नेहरू जी ने भारत को आधुनिकीकरण के रास्ते पर आगे बढ़ाया। लोकतांत्रिक आचारों के साथ मजबूत भारत के निर्माण में उनके योगदान से कोई भी इनकार नहीं कर सकता। नेहरू ने अपने कंधों पर नये स्वतंत्र देश को दृढ़ता से संभालते हुए नये भारत के निर्माण की दिशा में ठोस काम किया। आने वाली पीढ़ियां सदा ही उनके नेतृत्व और दूरदृष्टि के लिए याद करेंगी।

नेहरु जी की शुरुआती जिंदगी: परिवार, शिक्षा और राजनीति में आने से पहले का जीवन

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को हुआ था। स्वरुप रानी और मोतीलाल नेहरू की संतान के तौर पर नेहरू जी का बचपन खुशियों और उल्लास के बीच बीता। उनका परिवार अपनी प्रशासनिक क्षमता और करिश्मे के लिए जाना जाता था। भारत के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और प्रसिद्ध वकील उनके पिता मोतीलाल नेहरू उनके पहले शिक्षक थे जिन्होंने उनको शिक्षा के महत्व के बारे में बताया। उनकी पढ़ने में काफी रुचि थी और बचपन में ही नेहरू जी को विविध ज्ञानार्जन हो गया था। उनकी प्राथमिक शिक्षा उनके घर पर ही हुई, जहां शिक्षक उनके घर पर आकर पढ़ाते थे। 15 साल की उम्र में नेहरू जी अपनी स्कूली शिक्षा हासिल करने के लिए इंग्लैंड गये। 17 साल की उम्र में नेहरू जी ने कैम्ब्रिज में प्रवेश लिया और अपनी पढ़ाई पूरी की। 1912 में वो स्वदेश वापस लौटकर सीधे भारतीय राजनीति में शामिल हो गए। अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों का विश्लेषण करने में उनकी हमेशा से ही रुचि रही और विदेशी प्रभुत्व वाले देशों के इतिहास को लेकर वे चिंतित रहते थे। स्वतंत्रता के लिए भारत के संघर्ष में और स्वतंत्रा हासिल करने के बाद नेहरू जी का योगदान सदैव स्मरणीय और महत्वपूर्ण रहेगा। आधुनिक शिक्षा और प्रगतिशील नजरिये के प्रति उनके सबक भारत के लिए ताकत हैं। आज भी उनके करिश्मे की प्रशंसा की जाती है। 1916 में नेहरू जी की शादी कमला नेहरू से हुई और इसके बाद उनकी बेटी इंदिरा का जन्म हुआ जो आगे चलकर भारत की प्रधानमंत्री बनीं। उनका धार्मिक दृष्टिकोण हमेशा धर्मनिरपेक्ष था।

पंडित नेहरु की राजनीतिक यात्रा

इंग्लैंड से लौटकर राजनीति में शामिल होना नेहरू जी के जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ था। गांधी जी ने ही नेहरू जी को प्रभावित किया और सलाह दी कि आजादी कैसे हासिल की जा सकती है। उनकी पहली राजनीतिक भागीदारी तब हुई जब उन्होंने 1912 में बांकीपुर कांग्रेस सम्मेलन में हिस्सा लिया। 1919 में उन्होंने होम रुल लीग के सचिव का प्रभार संभाला। 1920 में जब उन्होंने उत्तर प्रदेश में पहले किसान मार्च का आयोजन किया तो नेहरू जी की नेतृत्व प्रतिभा स्पष्ट तौर पर दिखाई दी। असहयोग आंदोलन और नमक सत्याग्रह के दौरान भी गांधी जी के दाहिने हाथ रहे नेहरू जी को अंग्रेजी हुकूमत ने जेल में डाल दिया।

पंडित जवाहरलाल नेहरू की सबसे बड़ी खूबी ये थी कि वो काफी अनुभवी थे, उन्होंने दुनिया के अधिकांश हिस्सों की यात्रा की थी और कमजोर तथा पीड़ित देशों द्वारा आयोजित कई सम्मेलनों में हिस्सा लिया था। नेहरू को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर चुना गया। इस अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार से पूर्ण आजादी हासिल करने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करना था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बॉम्बे अधिवेशन में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरूआत की गयी, जिसमें भारत से औपनिवेशिक शासन के अंत की मांग की गयी। भारत छोड़ो का यह प्रस्ताव जवाहरलाल नेहरू द्वारा रखा गया। बाद में नेहरू और अन्य प्रमुख नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।

भारत की स्वतंत्रता में उनका योगदान

  • 1916 में नेहरू जी होम रुल आंदोलन में शामिल हुए और एनी बेसेंट के होम रूल लीग के सचिव बने।
  • उन्होंने 1920 में असहयोग आंदोलन में भाग लिया और संयुक्त प्रांत में आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्हें 1921 में ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के कारण गिरफ्तार किया गया।
  • स्वतंत्रता के लिए भारत की लड़ाई का अंतर्राष्ट्रीयकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • नेहरू को 29 दिसंबर, 1929 को लाहौर अधिवेशन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर चुना गया, उन्होंने पूर्ण स्वराज के लिए प्रस्ताव पेश किया।
  • वे 1930 में सविनय अवज्ञा आंदोलन के महत्वपूर्ण नेता थे और इसके कारण उनको गिरफ्तार किया गया।
  • 1939 में भारत छोड़ो आंदोलन में उन्होंने प्रमुख भूमिका निभाई।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के मुश्किल दौर में 1940 में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के लिये दिशा दिखाई।

भारत के राजनीतिक इतिहास में नेहरू जी की भूमिका अपरिहार्य है। पढ़ाई के बाद स्वदेश लौटने से लेकर मृत्युपर्यन्त नये और आधुनिक भारत का निर्माण करने में नेहरू जी की भागीदारी अतुलनीय और अविस्मररणीय है। भारत के भविष्य को लेकर उनके दूरदर्शी नजरिये ने कालान्तर में सत्ता में आने वाली हर सरकार की मदद की है। नेहरू जी ने ही सरकार और लोगों को करीब लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आज के विपरीत पहले देश के नागरिक ही सबसे पहले थे और इन सब का कारण सिर्फ नेहरू जी थे। जैसा कि रामचंद्र गुहा ने लिखा है कि नेहरू जी एक ओर संप्रभु जनता और मध्यम वर्ग तथा दूसरी ओर भारत और बाकी विश्व के बीच जोड़ने वाले कारक थे।

सम्मान और उपलब्धियां

  • भारत के पहले प्रधान मंत्री
  • 1955 में भारत रत्न
  • आईआईटी और एम्स जैसे बेहतरीन संस्थानों का निर्माण
  • एचईसी जैसे भारी उद्योगों की बुनियाद रखी
  • गुटनिरपेक्ष आंदोलन की नींव रखी
  • चाचा नेहरु की विरासत और उनका निधन

भारत में नेहरू जी ने पूरी तरह से समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर 17 साल तक सरकार चलायी। उन्होंने कभी लोगों के बीच किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं किया। उन्होंने हमेशा सरदार पटेल, डॉ. बी आर अम्बेडकर जैसे नेताओं से इस बारे में राय ली कि भारत के लोगों का जीवन और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है। वे जनप्रिय प्रधानमंत्री थे जो कभी नहीं चाहते थे कि भारत अपने पुराने अतीत की तरफ वापस लौटे। नेहरू जी के शासनकाल के दौरान किसी विशेष धार्मिक विचारधारा को अधिक तवज्जों देने जैसा कोई काम कभी नहीं हुआ। नेहरू के बाद भारत को नेहरू जैसा बेहतरीन नेता नहीं मिला। बच्चों के प्यारे चाचा नेहरू 27 मई, 1964 को 74 साल की आयु में इस दुनिया को छोड़ गये। नेहरू जी को इतिहास में हमेशा आधुनिक भारत के सबसे आधुनिक और प्रभावशाली निर्माता के रूप में याद किया जाएगा।