बोधगया बम ब्लास्ट: महाबोधि मंदिर को उड़ाने की साजिश रचने वालों को हुई 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा

बोधगया बम ब्लास्ट: महाबोधि मंदिर को उड़ाने की साजिश रचने वालों को हुई 10 साल से लेकर उम्र कैद तक की सजा

NIA विशेष न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मल्होत्रा द्वारा महाबोधि मंदिर को उड़ाने की साजिश रचने वाले पांच अभियुक्तों को 10-10 साल एवं बाकी को उम्र कैद की सजा सुनाया गया.

महाबोधि मंदिर परिसर

आज का फैसला जानने से पहले आखिरकार पूरी घटना क्या है? सबसे पहले इसे जान लेते हैं. आज से लगभग 3 वर्ष 11 महीना पहले बोधगया में काफी खुशनुमा दिन था. विशेषकर महाबोधि मंदिर में देश विदेश से मेहमान धर्मगुरु दलाई लामा की पूजा समारोह में आए हुए थे. जिसमें तत्कालीन राज्यपाल भी दर्शन के लिए आए हुए थे. काफी भीड़ थी जो मंदिर के बाहर ही लोग थे क्योंकि अंदर विशेष श्रद्धालु थे. धर्मगुरु दलाई लामा का प्रवचन का समापन हुआ और सत्यपाल मलिक चले गए. उसके बाद आम श्रद्धालुओं में प्रवेश को लेकर अफरा-तफरी मच गई जिसका फायदा आतंकवादी संगठन ने उठा लिया और 4 जगह बम को प्लांट कर दिया।

महाबोधि मंदिर के गेट संख्या 4, महाबोधी सोसायटी ऑफ इंडिया, मस्जिद मार्ग और कालचक्र मैदान के उत्तरी हिस्से, एवं कालचक्र के सामने बने शौचालय में आतंकवादियों द्वारा बम को प्लांट कर दिया गया.

हालांकि कालचक्र मैदान के नजदीक थरमस में लगा बम विस्फोट हुआ लेकिन ज्यादा शक्तिशाली ना होने की वजह से कोई भी जान माल या भारी क्षति नहीं हुई।

सबसे पहले सफाई कर्मी की नजर पड़ी बम पर

महाबोधि मंदिर के गेट संख्या 4 के पास रखी बम वाला बैग पर एक बीटीएमसी के सफाई कर्मी की नजर पड़ी. वे किसी श्रद्धालु की बैग समझ कर मंदिर में तैनात पुलिसकर्मी को सौंप दिया. जिसका स्कैनिंग के दौरान केन बम होने का पता चला. उसके बाद एटीएस एनआईए और एनएसजी के जांच पड़ताल के बाद बाकी सभी बमों को निरंजना नदी में डिफ्यूज किया गया

जांच पड़ताल करते हुए एनएसजी टीम

आज का फैसला

एनआईए कोर्ट ने आज फैसला का ऐलान कर दिया है जिसमें 5 को 10-10 साल की सजा एवं बाकियों की उम्र कैद हुई है. इस मामले में कुल 9 अभियुक्त थे इसमें से एक जहीदुल इस्लाम ने अपना अपराध को स्वीकार नहीं किया है. इसके अलावा सभी ने अपना अपराध को स्वीकार किया. जिसमें नूर आलम मोमिन, अहमद अली उर्फ कालू और पैगंबर शेख को उम्र कैद की सजा हुई है. बाकी सभी को 10 साल की सजा हुई।

इनमें कुल आठ अभियुक्तों ने अपना अपराध को स्वीकार किया था. उनमें अहमद अली उर्फ कालू, दिलावर हुसैन, पैगंबर शेख, मुस्तफुर रहमान उर्फ शाहीन उर्फ तुहिन, अब्दुल करीम उर्फ करीम शेख एवं मोहम्मद आदिल शेख उर्फ अब्दुल्लाह शामिल है।

इन सभी के खिलाफ केंद्र सरकार के विरुद्ध युद्ध करना, केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ आपराधिक बल प्रदर्शन, सरकार के विरुद्ध हथियार इकट्ठा करना इत्यादि मामलों में दोषी पाए गए थे. इसके बाद कोर्ट ने इन सभी पर भादवि की धारा 121, 121A, 122, 123, 471 भादवी 16,18,20 यूएपी एक्ट 4-5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए सजा का ऐलान किया गया है।