एड्स

एड्स

एड्स (AIDS) अर्थात् मौत ! अभी के समय में मौत का तांडव कर रहे कोरोना (covid 19) वायरस का पिता एड्स को कहा जा सकता है। पिता इसलिए कहा जा सकता है की यह संगीन महामारी अभी तक लाइलाज है।जिस व्यक्ति को एड्स होने का पता चल जाता है अर्थात् उसको अपने मौत का तारीख पता चल जाता है तो आइए दोस्तो समझते है की आखिर एड्स (AIDS) हैं क्या बला तथा क्यों होती है ? एवं बचने का उपाय भी जाने।

HIV – Human Immunodeficiency Virus (ह्यूमन इम्यूनोडिफिसीअंसी वायरस)

AIDS – Acquired Immuno Deficiency Syndrome (एक्वायर्ड इम्यूनो डेफिशिएंसी सिंड्रोम)

1 दिसंबर – विश्व एड्स दिवस

एड्स अंतराष्ट्रीय चिन्ह – लाल फीता

सामान्य परिचय :

HIV एक प्रकार का सूक्ष्म वायरस है , HIV तथा AIDS दोनो समान नही बल्कि दोनो में बहुत ही अंतर है। सबसे पहले किसी भी व्यक्ति को HIV होता है अर्थात वह व्यक्ति HIV से ग्रसित होकर समान्य स्तर पर बीमार पड़ जाता है तो उसमे HIV से AIDS बनने तक का सफर लगभग 8 से 10 वर्षो तक का होता है। कुछ लोग टेस्ट नहीं करवाते क्युकी उनको लगता है की उनका आत्म सम्मान पर ठेस पहुंचने वाला है , यदि टेस्ट करवा भी लिया तो लोग ऐसा बर्ताव करेंगे मानो की वो दूसरा ग्रह से आया है। उसके बाद वो व्यक्ति डिमोटिवेट हो जाता है , जिसको ये बीमारी होती है वो लोग समाज की इस बर्ताव की वजह से टेस्ट तक नही करवाते जिससे aids और भी फैलता है।लोगो को यह भ्रम होता है की छूने से हो जाएगा , जबकि ऐसा नही होता है ।

HIV , AIDS होने का प्रमुख कारण :

  1. HIV संक्रमित व्यक्ति से यौन संबंध से
  2. HIV संक्रमित व्यक्ति के द्वारा प्रयोग की गई सुई (निडिल) से
  3. HIV संक्रमित मां से जन्म
  4. समलैंगिक यौन संबंध
  5. HIV ग्रसित व्यक्ति के द्वारा खून देने के क्रम

AIDS (एड्स) का प्रमुख लक्षण :

  • दर्द (पेट , सिर , पैर )
  • शरीर से पसीना आना
  • बुखार
  • खांसी सूखी हुई
  • थकान
  • लसीका में सूजन
  • मुंह में छाले पड़ना
  • वजन तेजी से घटना

AIDS से बचाव :

सभी को व्यक्ति वर्ष में एक बार HIV की जांच करवानी चाहिए जीवन सुरक्षा की दृष्टि से । शरीर हमेशा स्वच्छ रखे यौन संबंध कार्य कम ही करे यदि करे तो प्रोटेक्शन के साथ करे । अपनी स्वास्थ्य के प्रति हमेशा सजग रहे। आपको कुछ भी लक्षण महसूस होता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

HIV तथा AIDS का प्रभाव :

जिस व्यक्ति को HIV होता है तो उस व्यक्ति में बुखार , सिर तथा शरीर के कुछ हिस्सों में दर्द , शरीर पर एक अलग तरीके का निशान (चक्ता) हो जाना आम बात है । HIV एक अति सूक्ष्म वायरस है यह शरीर में प्रवेश करता है उसके बाद से श्वेत रक्त कोशिकाएं को मारना शुरू कर देता है , श्वेत रक्त कोशिकाएं का कार्य बाहरी संक्रमणों से बचाना होता है जब यही खुद असुरक्षित है तथा धीरे धीरे समाप्त हो रही है तो बचाव क्या करेगी। जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होने लगता है तथा HIV अब AIDS मे धीरे धीरे परिवर्तित होने लगता है ।

AIDS (एड्स) का इतिहास :

मानना है की सबसे पहले 19वी शताब्दी में अफ्रीका के बंदरो में पहचान किया गया था । बंदरो से ही इंसानों में फैला है। दरअसल उस समय वहां के इंसान बंदरों को खाते भी थे , सबसे पहले 1920 में यह बीमारी अफ्रीका के कांगो में फैली थी , 1959 में कांगो के एक बीमार व्यक्ति की खून जांच के बाद HIV मिला था। यह पहला HIV संक्रमित व्यक्ति था। उस समय कांगो सेक्स का गड़ भी था । यही से अन्य देशों में भी HIV/AIDS फैला।

अभी भारत में भी बहुत तेजी से पैर पसार रहा है। भारत में 22 लाख लोग ग्रसित है । सबसे ज्यादा 3.3 लाख लोग महाराष्ट्र का तथा 1.34 लाख उत्तरप्रदेश का है। यह आंकड़ा 2020 का है।