Dipawali: दीपावाली एक महापर्व

Dipawali: दीपावाली एक महापर्व

दीपावली का नाम सुनते ही शरीर की हर हिस्से में जोत की प्रकाश दौड़ने लगती है। तन मन हर्ष उल्लास के सागर में डूबता चला जाता है। त्रेता युग से मनाई जाने वाली यह महापर्व भारतीय सभी पर्वों के शीर्ष पर विराजमान है। एक नजर से तो भारत त्योहारों का बहुत बड़ा राष्ट्र माना जाता है , जहां दीपावली , होली , दशहरा , छठ , ईद, बकरीद जैसे महान पर्व पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। आज kahanitak.com से दीपावली के बारे में लेख पढ़ेंगे।

दीपावली – Dipawali

लोगों का मानना है कि दीपावली अर्थात दिवाली त्रेता युग से ही मनाए जाने वाली एक महान महापर्व है। जब अयोध्या के राजा; राजा दशरथ के बड़े पुत्र श्री राम , जिन्हे दुनिया मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के नाम से जानती हैं। श्री राम जी अपने पिता के दिए हुए वचनों को पालन कर 14 वर्षों के पश्चात अपने पत्नी सीता एवं छोटे भाई लक्ष्मण के साथ अपने नगरी पधारे। तो इन्हीं की स्वागत तथा अपने उल्लास को व्यतीत करने एवं उस अमावस्या की अंधेरे को उजाला में परिवर्तित करने के लिए लोगों के द्वारा दीपक जलाए गए। उसी समय से उस दिन को याद करने के लिए प्रत्येक वर्ष दीप जलाया जाता है।

दीपावली की तैयारियां – Diwali preparations

दीपावली की तैयारी भारत के सभी हिस्सों में देखने को मिलती है। दीपावली दशहरा महापर्व से 21वें दिन बाद मनाया जाता है तथा इसके 6 दिन बाद छठ पूजा भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है।

सबसे पहले घर का सभी सदस्य जो बाहर रहकर कोई भी कार्य करते हैं वे सभी इस महापर्व पर जरूर पहुंचेंगे। उसके बाद घर की बहुत ही बारीकी तरह से साफ सफाई होती है। घर के सभी वस्तुएं को एक बार अवश्य साफ किया जाता है। लिपाई – पुताई भी जोरो शोरो से चलता है।

दीपावली के दो दिन पहले एक और पर आता है , जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है उसका नाम धनतेरस है। दिवाली की रात अमावस्या के दो दिन पहले त्रयोदशी होती है इसी त्रयोदशी को धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। धनतेरस के दिन तक लगभग घर की पूरी साफ सफाई हो चुकी होती है। धनतेरस के दिन पुराने बर्तनों को बदलकर नए बर्तनों को लेने का पारंपरिक रिवाज होता है। इसी दिन घर में कुछ न कुछ नई खरीदारी जरूर होती है। लोगों का मानना है कि इस दिन चांदी अवश्य खरीदना चाहिए।

दीपावली के एक दिन पहले तक सभी साफ – सफाई पूरी हो चुकी होती है , दीप जलाने के लिए दिया , मोमबत्ती , घी इत्यादि की व्यवस्था भी हो गया रहता है। बच्चों के लिए पटाखे भी बाजार से खरीद कर आ गया होता है और बेसब्री से दीपावली की रात का इंतजार होता है।

दीपावाली की दिन – Dipawali day

दीपावली के दिन एक अलग ही चहल-पहल होती है। सभी कोई नए नए कपड़े पहनकर आस्था की सागर में डूबे हुए होते हैं। दीपावली के दिन ही सभी व्यवसाई , उद्योगपति अपना अपना लेखा-जोखा करने वाला रजिस्टर या डायरी को बदल देते हैं। सभी कोई लक्ष्मी जी और गणेश जी का पूजन अत्यंत श्रद्धा एवं आस्था के साथ करते हैं। सभी के दरवाजे के सामने एक रंगोली जरूर बनाया जाता है जो इस रात को और खूबसूरत बनाते हैं।

रात में पूजा का समय होते ही सभी कोई अपने घर के चारों तरफ घी का दीप जलाना शुरु करते हैं। नियम है कि एक दीप से दूसरे दीपू को जलाया जाता है जिससे एक सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। देखते ही देखते अमावस्या की काली रात दिन के उजाले में बदल जाता है , सभी प्रभु राम तथा माता सीता को ध्यान लगाए रहते हैं। मानो कभी भी रथ आ सकता है।

दीप ज्वलित पूजन के बाद सभी कोई प्रसाद घर घर जाकर वितरित करते हैं तथा सभी के घर तरह तरह के पकवान बने हुए होते हैं जो आपस में मिलजुल कर खाते हैं। जो अदभुत विश्वास और प्रेम के सागर में बांधता है। दीपावली की रात में काली पूजन भी किया जाता है। इस रात को महानिशा भी कहा जाता है। कुछ लोग आधी रात से एक मंत्र का जाप करते हैं जिन्हें पुण्य कार्य लाभ प्राप्त होता है।

सभी राज्यों में दीपावाली – Dipawali in all states

भारत राष्ट्र के लगभग सभी राज्यों में 4 से 5 दिनों तक दीपावली को कुछ अलग अलग अंदाज एवं परंपराओं के साथ मनाया जाता है। जैसे गुजरात में गुजराती लोग दिवाली के अगले दिन गुजराती नव वर्ष दिवस , बेस्टू वर्ष मनाते हैं। महोत्सव का आरंभ वाग बरस से होती है उसके बाद धनतेरस , काली चौदश , दिवाली बेस्टु वरस तथा भाई दूज आते हैं। कोलकाता में दिवाली काली पूजा या श्यामा पूजा के साथ मेल खाती हैं। देवकाली को हिबिस्कुस फूलों से सजाया जाता है तथा दीप जलाया जाता है। उड़ीसा में दिवाली के अवसर पर कौरिया काठी करते हैं यह एक ऐसा अनुष्ठान है जिसमें लोग स्वर्ग पधारे पूर्वजों की पूजा करते हैं। इसी प्रकार लगभग सभी राज्यों में कुछ अलग परंपराओं के साथ दीप जलाकर प्रभु श्री राम का ध्यान लगाकर , माता लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा अर्चना करते हैं।

दीपावाली में सावधानियां – Precautions in Deepawali

हम सभी पर्व को उत्सुकता से मनाते हुए सावधानियां को भी नहीं भूलना चाहिये नहीं तो यह खुशी गम में बदल सकती हैं! दूसरे को निम्न सावधानी बरतने के लिए बोले तथा खुद भी सावधान रहे।

1. दीप जलाते समय किसी भी छोटे बच्चे को आसपास ना छोड़े।

2. बच्चों को पटाखा अवश्य दें लेकिन अकेला ना छोड़े।

3. बहुत तेज आवाज वाले पटाखे न छोड़ें।

4. जहां भी पटाखे छोड़े तो पहले से बाल्टी में पानी तथा कंबल को पानी में भिगोकर अवश्य रखें।

5. एक बार में कोई एक ही पटाखा फोड़े।

6. कोई पटाखा नहीं फोटो तो पुनः फोड़ने का प्रयास न करें।

7. कभी भी नंगे पर पटाखा ना फोड़े।

8. घर के अंदर पटाखों ना छोड़े।

9. जितना हो सके कौन पटाखा का प्रयोग करें पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए।