बस एक साल :-कविता

बस एक साल :-कविता

यू बिस्तर पे सोए सोए क्यों जीता है ख्वाब में , बस एक साल झोंक दे खुद को मेहनत की आग में!!

जब शीशे से पत्थर तोड़ा जाएगा , तभी तो नाम इतिहासो में लिखा जाएगा ,

यह किस्मत नामक भ्रम जाल तुम्हें छोड़ना होगा , याद रख तुझे शीशे से पत्थर तोड़ना होगा , यू बिस्तर पे सोए सोए क्यों जीता है ख्वाब में , बस एक साल झोंक दे खुद को मेहनत की आग में !! पांव से लहू टपके इस कदर चलना होगा ,. कलाम साहब की बात याद कर चमकने से पहले जलना होगा , मोबाइल फोन को भी हटा , दोस्त को भी भूला दे , पूरी रात पढ़ाई कर नींद को कहीं और सुला दे , तेरे अंदर अनंत शक्तियां है तू झांक अपने आप में , बस एक साल झोंक दे खुद को मेहनत की आग में!! यू खाली सोने से क्या होगा , दिल पर रख हाथ पूछ ऐसे रोने से क्या होगा , भुला दे अपने अतीत को , भुला दे अपने मीत को आगे अपनी जवानी बना ले , अपना भविष्य स्वयं लिख खुद को प्रचंड ज्ञानी बना ले , तेरे अंदर अनंत शक्तियां है तू झांक अपने आप में , बस एक साल झोंक दे खुद को मेहनत की आग में!! आलस्य तेरी शत्रु मेहनत तेरी तलवार है , मत देख जालिम जमाना को तेरे अंदर ही शक्तियों का भरमार है , पहचान खुद को निकल अपनी तलाश में , एक पैर जमीन पर रख एक पैर आकाश में , यू बिस्तर पर सोए सोए क्यों जीता है ख्वाब में , बस 1 साल झोंक दे खुद को मेहनत की आग में ! बस 1 साल झोंक दी खुद को मेहनत की आग में!! बस 1 साल!!!